Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full [extra Quality] May 2026
The Palitana 5 Chaityavandan is a central ritual for pilgrims performing the Shatrunjaya Giriraj Yatra. Each of the five Chaityavandans is performed at a specific sacred spot during the ascent to the summit. 1. First Chaityavandan: Jay Taleti (जय तलेटी)
Performed at the base of the hill to honor the entire sacred mountain. Hindi Text Excerpt:
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।"
Significance: It marks the beginning of the spiritual journey, acknowledging the countless souls who attained liberation on this hill.
2. Second Chaityavandan: Shree Shantinath (श्री शांतिनाथ) Dedicated to the 16th Tirthankara, Lord Shantinath. Hindi Text Excerpt:
"शांति जिनेश्वर सुमिरिये, जेनी अचिरा माय,विश्वसेन कुल उपन्यो, मृग लांछन पाय।"
Significance: Devotees pray for inner peace and the removal of worldly obstacles.
3. Third Chaityavandan: Rayan Pagla (रायरण पगला)
Performed at the sacred Rayan tree where the first Tirthankara, Lord Adinath, used to sit in meditation. Hindi Text Excerpt:
"श्री शत्रुंजय आदिजिन आविया, पूर्व नवाणु वारजी,अनंत लाभ इहाँ जिनवर जाणी, समोसर्या निर्धारजी।"
Significance: Commemorates the 99 visits of Lord Adinath to this holy site.
4. Fourth Chaityavandan: Shree Pundarik Swami (श्री पुंडरीक स्वामी)
Dedicated to the chief disciple and grandson of Lord Adinath, who achieved salvation here. Hindi Text Excerpt:
"एक दिन पुंडरीक गणधरु रे लाल, पूछे श्री आदि जिणंद सुखकारी रे;कहिये ते भवजल उतरी रे लाल, पामीश परमानंद भव वारी रे।"
Significance: Highlights the path to liberation shown by the first Ganadhara. palitana 5 chaityavandan in hindi full
5. Fifth Chaityavandan: Lord Adinath (श्री आदिनाथ भगवान)
Performed at the main temple at the summit dedicated to the Moolnayak (primary deity). Hindi Text Excerpt:
"माता मरुदेवीना नंद, देखी तारी मूर्ति मारुं मन लोभाणुजी;मारुं दिल लोभाणुजी... करुणा नगर करुणा सागर, काया कंचनवान।"
Significance: The final devotional act of the yatra, celebrating the glory of Lord Rishabhdev (Adinath). Pilgrimage Logistics
The climb involves approximately 3,500 to 3,750 steps to reach the summit, which houses over 800 marble-carved temples. Most pilgrims start very early (around 6:00 AM) to avoid the heat. Expand map Shree Siddhagiriraj Yatra Five Chaityavandans - Tattva Gyan
पलिताना (शत्रुंजय महातीर्थ)
की यात्रा के दौरान 5 मुख्य स्थानों पर चैत्यवंदन करने का विधान है। यहाँ इन 5 चैत्यवंदन के नाम और उनके हिंदी अर्थ के साथ संक्षिप्त लेख दिया गया है। Tattva Gyan
पलिताना शत्रुंजय महातीर्थ: 5 प्रमुख चैत्यवंदन
शत्रुंजय गिरिराज जैन धर्म का शाश्वत और सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है। यहाँ की यात्रा तब पूर्ण मानी जाती है जब यात्री इन पांच प्रमुख स्थलों पर चैत्यवंदन और दर्शन करते हैं।
जय तलेटी चैत्यवंदन (Jay Taleti)
पर्वत की तलहटी में स्थित यह पहला वंदना स्थल है। पर्वत चढ़ने से पहले यात्री यहाँ भावपूर्वक वंदन करते हैं। Tattva Gyan हिंदी सार:
"हे शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र! आपके दर्शन मात्र से दुर्गति का नाश होता है। जो भी भव्य जीव भावपूर्वक इस पर्वत पर चढ़ता है, वह संसार सागर से पार उतर जाता है।" Tattva Gyan
श्री शांतिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Shree Shantinath Bhagwan) पर्वत के ऊपर स्थित
शांतिनाथ भगवान के जिनालय The Palitana 5 Chaityavandan is a central ritual
में यह दूसरा चैत्यवंदन किया जाता है। Tattva Gyan हिंदी सार:
"16वें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ प्रभु को मैं वंदन करता हूँ, जो शांति के सागर और भक्तों को सुख देने वाले हैं। उनका कंचन वर्ण शरीर और शांत मुद्रा चित्त को प्रसन्न करती है।" Tattva Gyan
रायण पगला चैत्यवंदन (Rayan Pagla)
यह स्थान उस रायण वृक्ष के नीचे है जहाँ आदिनाथ प्रभु के चरण पादुका प्रतिष्ठित हैं। माना जाता है कि आदिनाथ प्रभु यहाँ 99 बार पधारे थे। Tattva Gyan हिंदी सार:
"इस गिरीराज पर आदिदेव के चरण पादुका रायण वृक्ष के नीचे सुशोभित हैं। इस तीर्थ की महिमा अनंत है, जिसका वर्णन करना कठिन है। यहाँ के कण-कण से अनंत आत्माएं सिद्ध हुई हैं।" Tattva Gyan
श्री पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन (Shree Pundarik Swami)
श्री पुंडरीक स्वामी भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर थे, जिन्होंने चैत्री पूर्णिमा के दिन 5 करोड़ मुनियों के साथ इसी पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया था। Tattva Gyan हिंदी सार:
"भगवान आदिनाथ के गुणवान गणधर पुंडरीक स्वामी को प्रणाम, जिन्होंने शुक्ल ध्यान ध्याकर मोक्ष प्राप्त किया। उन्हीं के नाम से इस पर्वत का नाम 'पुंडरीक गिरि' भी पड़ा।" Tattva Gyan
मुख्य मंदिर आदिनाथ प्रभु चैत्यवंदन (Main Temple - Lord Adinath)
यह अंतिम और मुख्य चैत्यवंदन है, जो शत्रुंजय के मुख्य मंदिर (दादा की टूंक) में मूलनायक आदिनाथ भगवान के सम्मुख किया जाता है। Tattva Gyan हिंदी सार:
"विनीता नगरी के राजा और नाभिराय-मरुदेवा के नंदन आदिदेव ऋषभदेव प्रभु को वंदन। उनका 500 धनुष का विशाल देह और करुणा से भरा हृदय जगत का कल्याण करने वाला है।" Tattva Gyan यात्रा के लिए सुझाव:
प्रत्येक चैत्यवंदन के साथ संबंधित स्तवन (Stavan) स्तुति (Stuti)
का गान करने से भाव और भक्ति बढ़ती है।
तीर्थ की पवित्रता बनाए रखने के लिए ऊपर पर्वत पर रात्रि विश्राम वर्जित है। Tattva Gyan सिद्धों को नमस्कार
क्या आप इन चैत्यवंदन के
पूर्ण श्लोक (प्राकृत/गुजराती मिश्रित)
भी हिंदी लिपि में देखना चाहेंगे? Expand map
Shree Shantrunjay giriraj Yatra Five Chaityavandans - jainsite
यहाँ पर पालीताना के पाँच चैत्यवंदन का पूरा पाठ हिंदी में प्रस्तुत है। ये सभी जैन धर्म में प्रसिद्ध और नियमित रूप से बोले जाने वाले चैत्यवंदन हैं।
पांच चैत्यवंदन क्या हैं?
पालिताना जैन मंदिर के समूह में हजारों मंदिर हैं, लेकिन मार्गदर्शक (मार्ग-दर्शक पुस्तिका या ग्रंथ) में विशेष रूप से पांच प्रमुख मंदिरों का वर्णन किया गया है। इन पांच मंदिरों में की जाने वाली वंदना को ही 'पांच चैत्यवंदन' कहा जाता है। यात्रीगण विशेष रूप से इन पांच स्थानों पर जाकर पूजन-अर्चना करते हैं।
2. चैत्यवंदन (पालीताना में प्रचलित पाँचों में से एक)
उत्तम ठाणे ठियं वंदे, जिणं तं चरिमे त्ति संतं।
अहं करेमि वंदणं, तुहं साहु पसीद मे।।
हिंदी:
हे भगवन्! उत्तम स्थान (मोक्षस्थान) में स्थित, अंतिम शरीरधारी जिनेंद्र भगवान को मैं वंदन करता हूँ। हे साधो! आप मुझ पर प्रसन्न हों।
प्रेरणादायक कथा (पात्र सहित)
एक बार एक बूढ़े जैन मुनि अपने शिष्य को लेकर पालीताना पहुँचे। शिष्य ने पूछा- "गुरुदेव! 3500 सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल है। कोई आसान उपाय बताएँ?"
मुनि ने कहा- "बेटा, पाँच चैत्यवंदन ही आसान उपाय है। हर 100 सीढ़ी पर एक वंदन सोचो। पहली में अहंकार छोड़ो, दूसरी में कृतज्ञ बनो, तीसरी में सबको समान देखो, चौथी में दूसरों के लिए प्रार्थना करो, और पाँचवीं में अपने को भगवान में विलीन कर दो।"
शिष्य ने वैसा ही किया। जब वह ऊपर पहुँचा, तो उसे सीढ़ियों का अहसास ही नहीं हुआ। उसने पाया कि पाँच चैत्यवंदन केवल मंत्र नहीं, बल्कि एक योग यात्रा है।
पांच चैत्यवंदन का महत्व
- मोक्ष मार्ग: जैन धर्म में विश्वास किया जाता है कि जो भी श्रद्धालु इन पांच चैत्यवंदन को हृदय से करता है, उसके जीवन के सभी दोष दूर होते हैं और मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।
- कर्म निर्जरा: यह यात्रा और वंदना भारी कर्मों की निर्जरा (कर्मों का नाश) करने वाली मानी गई है।
- पुण्य संचय: इन पवित्र स्थानों पर जाकर पूजा करने से असंख्य पुण्यों का संचय होता है।
1. नमोकार मंत्र (सबसे पहला और मुख्य चैत्यवंदन)
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं
एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं।
हिंदी अर्थ:
अरिहंतों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सब साधुओं को नमस्कार। यह पाँचों नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में यह पहला मंगल है।
